Saturday, 13 August 2011

वाह री नारी तू धन्य है....


नारी तेरे अस्तित्व
बिना किसी रिश्ते
का मोल नहीं |
माँ बाप, भाई बहन,
प्रेमी प्रेमिका, पति पत्नी,
तेरे बिन सब अधूरे हैं |
रक्षाबंधन के मौके पर
जब सब लोग 

खुशी मनाते हैं
और गाते हैं ......
बहना ने भाई की 
कलाई से
प्यार बांधा है,
प्यार के दो तार से,
संसार बाँधा है,
रेशम की डोरी से
संसार बाँधा है |
तब मेरा मन
नमन करता है,
उन बहनों को,
जो कोख से जन्म,
ले ना सकी,
और मर गयी,
एक भाई की खातिर .!!!!!
वाह री नारी 
तू धन्य है,
जो फिर भी 
लुटती है,
मरती है 
एक पुरुष
की खातिर ....

.....अशोक अरोरा.....

Monday, 8 August 2011

तू जब भी लौट सके.....


हम सोच में खड़े थे
कि कहाँ जायें अब
ना कोई रास्ता ,
ना मंजिल कोई ,
ना कोई साथ था मेरे
जो भी मिले थे दोस्त
वो बेवफा मिले
तलाशते रहे हम इंसान,
ता उम्र...
हमें खुदा मिला
या फिर शैतान
ही मिले ....
एक दोस्त चाहते थे हम
खुद के वास्ते ...
कुछ ने दिखाए सपने
और कुछ् आंसू दे गए
हम ने छू लिया था
जिसके दिल को
उस दोस्त का
अब कोई पता नहीं ....
ना उसकी  अब कोई
खबर  मिले ..
वो खुद फैसला करता
तो गिला ना था मुझे
काश वो जानता कि
ये दुनिया तो
दोस्तों कि खुशी से  है जलें
इसलिए
वो दोस्त जो
दूसरों के कहने पर
चला करे ...
वो ,
भूल कर भी किसी से
दोस्ती ना  करे
पर आज भी
ये दिल अशोक का
घर है...तेरा
ए-दोस्त
तू जब भी लौट सके
लौट आना फिर .से ..
मेरी जिन्दगी में
मेरी धड़कन तरह  ||
रचना : अशोक अरोरा

Wednesday, 3 August 2011

हम हिदुस्तानी भी कमाल करते हैं.....


हम हिदुस्तानी भी
कमाल करते हैं
हर रोज़ हम मुम्बई
हमलो की बात करते हैं
और कहते हैं कि जब तक
कार्यवाही नहीं करोगे
हम बात नहीं करेंगे तुमसे
ये हमारा फैसला हैं....
वो कुछ नहीं करते
हम से कुछ नहीं कहते
और एक दिन अचानक
ये बात उछलती है
कि अब बात होगी
उन में और हम में
और अचानक एक हसीना
आसमान से यहां उतरती है
और वो वहां की सब से
जवां मंत्री है
और हम हिन्दुस्तानी
पलक पावंडे बिछाते हैं
और उस हसीना के ही
गुण गाते हैं
हम सब  को बताते हैं
क्या हसीं चेहरा है
इस नाज़नीन का
चश्मा भी ख़ूबसूरत
इस की आंखों पे है लगता
इठलाती है ऐसे जैसे
गुंच्चा हो फूलों का
हर चीज़ इस की गज़ब है
जो खुदा ने तराशी
हाथों में पर्स हो या
होंठों पे लाली
ये देश....ये मीडिया
सब उसी में खो जाते हैं
वो आ कर चली भी
जाती हैं यारों
मुद्दे सब ही
वहीं के वहीँ रह जाते हैं
ये तो त्रसादी हे मेरे देश की
जो भी लुटता है हम
उसी के गुण गाते हैं
उस की चकाचौंध में
खुद गुम हो जाते हैं
और
सारी दुनिया को बताते हैं.
कि..
आतिथि देवो भव:
इस लिए 'अशोक' कहता है
कि मेरा भारत महान.......

......अशोक अरोरा........